गुंजन बदल रही कूड़ा उठाने और भीख मांगने वाले गरीब नौनिहालों की जिंदगी

300 बच्चों को पहुंचाया स्कूल

हेमा जोशी,रामनगर।

भले ही केंद्र और राज्य सरकार ने शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं लागू की है लेकिन इसके बावजूद भी देशभर में लाखों बच्चे ऐसे हैं जो स्कूल जाने से वंचित है। ऐसे बच्चों को शिक्षा देने और उनके भविष्य को संवारने के लिए काम कर रही है नैनीताल के हल्द्वानी की बेटी गुंजन। जो शहर में भिक्षावृत्ति और कबाड़ का काम करने वाले नोनिहालों को एकत्र कर उन्हें स्कूलों तक पहुंचा रहे हैं गुंजन ने अब तक हल्द्वानी समेत आसपास के क्षेत्र से करीब 300 से अधिक छोटे बच्चों को एकत्र का स्कूलों में दाखिला करवाया है। नैनीताल हल्द्वानी में 13 साल से वीरांगना संस्था चला रही गुंजन अंधेरे में डूबे बच्चों के जीवन को प्रकाशमय करने का काम कर रही है। जिन हाथों में कभी भीख का कटोरा होता था, वह हाथ अब कलम-दवात थामे हैं। गुंजन का कहना है कि उनके यहां पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता से बात करने पर पता चला कि वह लोग पीढ़ी दर पीढ़ी कूड़ा बीनकर और भीख मांगकर ही जीवन यापन करते आ रहे हैं। ऐसे में उन्होंने अभिभावकों को समझाया और मुहिम चलाकर उन बच्चों को शिक्षा देने का काम किया जा रहा है। यही नहीं, बच्चों के आधार और अन्य प्रमाण पत्र बनवाकर उनको आगे की पढ़ाई के लिए संस्था द्वारा सहयोग किया जा रहा है।

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300 से अधिक बच्चों को शिक्षा से जोड़ा: गुंजन बताती हैं कि उन्होंने बच्चों का वर्तमान बेहतर करने और भविष्य सुधारने को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया है। उन्होंने अपने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे सड़कों पर भीख मांगते बच्चे जिनकी जिंदगी अंधकार में जा रही थी उनको देखे इन बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और उनका जीवन सुधारने का संकल्प लिया।

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खाने से लेकर कॉपी तक सब मिलता है

गुंजन ने बताया इस 13 सालों में उनको बहुत सारे विरोधों का भी सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने वीरांगना नाम की संस्था बनाई। भीख मांगने और कूड़ा उठाने वाले बच्चों को चिन्हित कर संस्था में लाकर उनको शिक्षा देने का काम शुरू किया। खास बात ये है कि यहां इन बच्चों को नाश्ते से लेकर दोपहर के खाने और कपड़े और कॉपी किताबें भी दी जाती हैं

बच्चों पर खर्च करती हैं अपना वेतन

गुंजन ने बताया कि इन बच्चों को शिक्षा देने के बाद उनको आसपास के सरकारी और निजी स्कूलों में एडमिशन दिलवाकर उन बच्चों की निगरानी भी की जाती है। जिससे कि बच्चे वापस कूड़ा बीनने या भिक्षावृत्ति न करने लगें। बताया कि वह हल्द्वानी के एक बैंक में कार्यरत हैं। वह अपने वेतन से प्रतिमाह कुछ धनराशि वीरांगना केंद्र पर आने वाले बच्चों पर खर्च करती हैं। इससे बच्चों की शिक्षा से जुड़ी जरूरतों को पूरा किया जाता है। समाज के कुछ लोगों द्वारा भी इसके लिए मदद की जाती है जिससे कि इन बच्चों के भविष्य को संवारा जा सके

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