हद है.. अब हाथीयो को सड़क में आने से रोकने के लिए वन विभाग खिला रहा मिर्च ,हाथी हुए आक्रमक।

उत्तराखंड में एलिफेंट कॉरिडोर में हो रहे अवैध अतिक्रमण का मामला नैनीताल हाईकोर्ट की शरण में पहुंच गया है, आज मामले में सुनवाई करते हुए नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायाधीश आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने मुख्य वन्य जीव संरक्षक,डीएफओ रामनगर, निदेशक कॉर्बेट पार्क को जवाब पेश करने के आदेश दिए हैं।
आपको बता दें कि इंडिपेंडेंट मेडिकल सोसायटी नैनीताल हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा है कि उत्तराखंड में हाथी कॉरिडोर में अवैध अतिक्रमण किया गया है उत्तराखंड में 11 हाथी कॉरिडोर है जिसमें से तीन मुख्य कॉरिडोर कॉर्बेट पार्क की सीमा से लगते हुए हैं जो 27 किलोमीटर लंबे हैं और राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित हैं, जिसमें क्षेत्र में पड़ने वाले कॉरिडोर में करीब 150 से अधिक रिसोर्ट का निर्माण किया गया है और रिसोर्ट के निर्माण के कारण या कॉरिडोर पूरी तरह से बंद हो चुके हैं वहीं कॉरिडोर बंद होने से हाथियों ने अपना रास्ता बदलकर दक्षिणी पतली दून से बना लिया और वहीं दूसरी तरफ मोहन क्षेत्र में भी बड़े रिसोर्ट का निर्माण कार्य होने की वजह से रात में नेशनल हाईवे में लगातार वाहनों के संचालन हो रहा है और हाथी समेत जंगली पशुओं को कोसी नदी तक पहुंचने में परेशानी हो रही है जिस वजह से वन्य जीव जंतुओं के व्यवहार में बदलाव आ रहा है और वह लगातार हिंसक हो रहे हैं इसी वजह से बीते 1 साल में करीब 20 से अधिक घटनाएं हुई हैं जिसमें हाथियों ने लोगों पर हमला किया है, वही याचिकाकर्ता का कहना है कि बड़े रिसोर्ट द्वारा जंगलों में आयोजित होने वाली शादियों समेत अन्य पार्टियों के दौरान रोशनी की वजह से वन्यजीवों के जीवन में खलल पड़ा है जिसको रोका जाए वही याचिकाकर्ता का कहना है कि वन विभाग द्वारा हाथियों को नेशनल हाईवे में आने से रोकने के लिए मिर्च का पाउडर खिलाया जा रहा है साथ ही पटाखे छोड़कर उनको नेशनल हाईवे में आने से रोका जा रहा है जो अवैधानिक है, मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने वन्यजीव संरक्षक डीएफओ रामनगर निदेशक कॉर्बेट पार्क से पूछा है कि जंगली हाथियों को मिर्च खिलाने जैसा कृत्य करने की अनुमति उनको किसने दी।

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