मानसरोवर की तरह से ही पवित्र यहां का जल

गौरव जोशी,नैनीताल

नवरात्रि में नैनीताल के पाषाण देवी मंदिर में भक्तो की भीड़ उमड़ने लगी है, नवरात्री में नैनीताल के मां पाषाण देवी मंदिर में देवी के 9 स्वरूपो के एक साथ र्दशन के लिए सुबह से ही भक्तों की भीड़ माॅ के मंदिर में लगने लगी है,,, पाषाण देवी मंदिर के साथ साथ नैनीताल के प्रसिद्ध मां नयना देवी मंदिर में माॅ की पूजा अर्चना के लिये बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं उमड़ रहे हैं,,,

खास है नैनीताल का माॅ पाषाण देवी मंदिर- 

नैनीताल के पाषाण देवी मंदिर नैनीताल के लोगो के साथ साथ पुरे देश से आने वाले भक्तो के लिए खासा महत्व रखता है और नवरात्री के पावन पर्व में यहा भक्तो का तात लगा रहता है,,, विशेष तौर पर नवरात्री के नवे दिन इस मंदिर का महत्व और भी बढ जाता है क्यो कि नैनीताल के इस मंदिर में माॅ भगवती के सभी 9 स्वरूपो के दर्शन एक साथ होते है,, जिसके लिए भक्त सुबह से ही माॅ पाषण देवी के मंदिर मे आने शुरू हो जाते है,,

क्यो कहा जाता है माॅ को पाषाण देवी- 

झील किनारे माॅ की चटटान में कुदरती आकृति बनी है और इसमें पिंडी के रूप में माता के 9 रूप हैं,,, इस मंदिर में माता को सिंदूर का चोला पहनाया जाता है,,, साथ ही ये भी कहा जाता है कि माता की पादुकाएं नैनीताल की झील के भीतर हैं,,, इसलीए झील के जल को कैलास मानसरोवर की तरह पवित्र माना जाता है,,, और भक्त इस नैनी सरोवर के जल को अपने घर भी लेकर जाते हैं,,,, माना जाता है जल को घर में रखने से घर में सुख शांति बनी रहती है साथ ही इसका प्रयोग करने से किसी प्रकार की बिमारी भी नही होती। 

मंदिर का भी अपना एक इतिहास है कहा जाता है कि एक अंग्रेज अफसर माॅ पाषाण देवी मंदिर से गुुजर रहा था,,, ओर अंग्रेज अफसर को माँ की मूर्ति पसंद नही आई और उसने माता की मूर्ति में कालिख पोत दी जिसके बाद मा ने अंग्रेज को अपनी शक्ति दिखाई और उसको मंदिर से आगे नही बढ़ने दिया,
जिसके बाद अंग्रेज को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने माँ से माफी मांगी और स्थानीय महिलाओं के सहयोग से उसने माता को सिंदूर का चोला पहनाया, तब अंग्रेज ओर उसका घोड़ा आगे बढ़ा, इसके बाद से यहां पर माँ का श्रृंगार सिंदूरी के चोले से किया जाता है, प्रत्येक मंगलवार और शनिवार व हरनवरात्र पर मां को चोली पहनाने की परंपरा है
यहा नवरात्री के दौरान मॅाता नवदुर्गा के रूप में वैष्णव विधी से पूजा होती है,,, जिसमें माता को शंख के जल से स्रान कराया जाता है और मान्यता है कि मां को स्नान कराए गए पानी से समस्त त्वचा रोग दुर होते है साथ ही अतृप्त व बुरी आत्माओं के प्रकोप भी समाप्त हो जाता हैं,,, और इस जल को लेने दूर-दूर से लोग नैनीताल के इस मंदिर में आते हैं। कहा जाता है कि इस जल के सेवन और स्रान से मनुष्य का हकलाना, जोड़ों में दर्द, सूजन समेत तमाम बीमारियां दूर हो जाती हैं,,, नवरात्री में पूजा अचना करने से मां भक्तों की मन्नतें पुरी करती है।

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