बंधुवा मजूदरों के पुनर्वास को लेकर हाई कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

हाई कोर्ट ने मामले में सरकार को स्थिति स्पस्ट करने के दिये निर्देश

मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खण्डपीठ में दिल्ली निवासी निर्मल गोराना बंधुआ मुक्ति मोर्चा की जनहित याचिका पर सुनवाई की,

आपको बता दे कि निर्मल गोरना ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि ग्राम मोहपुर रुड़की हरिद्वार के 18 बंधुआ मजूदरों को बार ग्राम उद्योग समिति द्वारा आलमवाला मोंगा पंजाब से मुक्त कराया गया था, जो वहां मजदूरी कर रहे थे। 22 जून 2014 को उन्होंने जिलाधिकारी हरिद्वार को पत्र लिखा कि इन मजदूरों की देखभाल व खाने की व्यवस्था की जाय। इनके पास खाने व रहने की व्यवस्था नहीं है परन्तु जिलाधिकारी द्वारा इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में यह भी प्रार्थना की है कि बंधुवा मजदूरों के पुनर्वास की व्यवस्था की जाय इसके लिए नियम भी बनाये जाएं। प्रदेश में जितने भी बंधुआ मजदूर कार्य कर रहे हैं उनको चिन्हित और बधुआ मजदूरी से मुक्त किया जाय। मामले को सुनने के बाद खंडपीठ ने शुक्रवार तक सरकार से स्थिति स्पष्‍ट करने को कहा है।

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