पिता की बीमारी विदेश से डॉक्टर बेटे को खींच लाई भारत, जिसके बाद बेटे को भारत मे विशिष्ट काम के लिए मिला पदमश्री।

हेमा जोशी, नैनीताल।

कुमाऊं विद्यालय ने आज अपना 16 वा दीक्षांत समारोह धूमधाम से मनाया,इस दौरान विश्व विद्यालय के द्वारा देश के जाने माने डॉ सौमित्र रावत को मानद उपाधि देकर सम्मानित किया, इस दौरान सौमित्र रावत ने कहा कि वह लंबे समय से विदेश में सेवाएं दे रहे थे लेकिन इसी बीच उनके पिता कि भारत में तबीयत खराब हो गई और उनकी मां ने उन्हें फोन कर पिता की तबीयत खराब होने की जानकारी दी, और वो अपने पिता की बीमारी की खबर सुनकर इतनी डर गए थे कि उन्होंने तत्काल भारत आने का फैसला किया जब भारत आए तो उनको एहसास हुआ कि उनको भारत में रहकर ही अपने देशवासियों की सेवा करनी चाहिए और इसके बाद तो फिर कभी वापस लौटकर नहीं गए, भारत आने के बाद उन्होंने सर गंगा राम अस्पताल में काम शुरू किया और अपने विशिष्ट कार्यों के लिए 2015 में सरकार के द्वारा उनको पद्मश्री सम्मान दिया गया कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल के दीक्षांत समारोह में नैनीताल पहुंचे डॉ रावत भावुक होते हुए उनको अपने देश और अपनों से दूर होने का एहसास भी उनको इसी दौरान हुआ था।

कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल में शनिवार को 16वां दीक्षांत समारोह मनाया गया है. इस दौरान 62 छात्र-छात्राओं को कुलपति गोल्ड मेडल दिए गए. वहीं, चार छात्राओं को गौरी देवी मेडल से सम्मानित किया गया है. इसके अलावा 150 छात्र-छात्राओं को पीएचडी की डिग्री प्रदान की गई, राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने सभी छात्रों को डिग्री और मेडल दिए. दीक्षांत समारोह ने कुमाऊं विश्वविद्यालय की ओर से इस बार सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को भी डी.लिट की मानद उपाधि देकर सम्मानित किया गया।

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