तो. तब नही बन पाए पंडित नारायण दत्त तिवाड़ी प्रधनमंत्री

हेमा जोशी, नैनीताल

प्रदेश के छोटे से लेकर बड़े चुनाव तक सुर्खियों में रहने वाले स्वर्गीय पंडित नारायण दत्त तिवारी की मौत को भी 1 साल पूरा नहीं हुआ है और कांग्रेस और भाजपा पंडित जी को पूरी तरह से भूल चुके हैं दोनों ही राजनीतिक दलों के मेनिफेस्टो में ना तो पंडित जी का नाम है और ना ही पोस्टर में पंडित की फोटो उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की राजनीति में केवल एक ऐसे शख्स थे जो विकास पुरुष के नाम से जाने जाते थे जिन को लेकर कांग्रेस हमेशा फ्रंटफुट में रहती थी और उनकी मौत के बाद भी कांग्रेस उनके अंतिम संस्कार था उनके साथ रहे लेकिन विडंबना यह है कि पंडित जी को जो सम्मान मिलना चाहिए था वह हमको नहीं मिला पंडित जी की फोटो दोनों ही दलों के बैनर से गायब है

पंडित नरेंद्र तिवारी ने 1980 में पहली बार नैनीताल से सांसद का चुनाव हुआ और राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा वहीं पंडित जी ने पहली बार ही सांसद का चुनाव जीता और सबसे कम उम्र के सांसद बने जिसके बाद पंडित जी ने अपने करीबी सत्येंद्र गुड़िया को 1984 में कांग्रेस से सांसद का टिकट दिलाया और जीत भी दर्ज कराई,, जिसके बाद 1989 में नैनीताल लोकसभा से जनता दल के महेंद्र पाल ने दर्ज की लगातार तीन बार कांग्रेस को जीत दिलाने वाले पंडित नरेंद्र तिवारी 1991 के दौरान राम लहर में भाजपा के बलराज पासी से चुनाव हार गए और यह वह समय था जब पंडित नारायण दत्त तिवारी को प्रधानमंत्री का प्रबल दावेदार माना जाता था लेकिन पंडित नरेंद्र तिवारी के मंसूबों पर भाजपा के बलराज पासी ने पानी फेर दिया और इस दौरान नरसिम्हा राव देश के प्रधानमंत्री बने,,


इस चुनाव में मिली हार के बाद पंडित नारायण दत्त तिवारी ने कहा कि अंतर कलह की वजह से वो चुनाव हारे  और पार्टी से नाराज होकर उन्होंने तिवारी कांग्रेस का गठन किया और इस बार फिर पंडित नारायण दत्त तिवारी सांसद बने,, हालांकि  सरकार 1 साल के अंदर ही गिर गई,,वही 1998 में एक नया इतिहास बना और इस बार कांग्रेस परिवार की बहू इला पंत भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ी और इला पंत ने एनडी तिवारी को मात दी,, इला पंत भारत रत्न गोविंद बल्लभ पंत की बहू थी,,जो कट्टर  कांग्रेसी थे,,वहीं 98 की हार के बाद 1999 में एक बार फिर लोकसभा के चुनाव में पंडित नारायण दत्त तिवारी ने जीत दर्ज करी हालांकि जीत दर्ज करने के 1 साल बाद ही उत्तराखंड का गठन हो गया और सोनिया गांधी से नजदीकियां होने के कारण पंडित नारायण दत्त तिवारी को उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बना दिया गया जिसके बाद पंडित नारायण दत्त तिवारी ने कांग्रेस के महेंद्र पाल को टिकट दिलाया इस बार कांग्रेस के महेंद्र पाल नैनीताल लोकसभा सीट से जीत दर्ज की,,,इतिहास पर नजर डालें तो 1952 में भारत रत्न गोविंद बल्लभ पंत के दामाद सीडी पांडे ने चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की जिसके बाद 1962,1966 और 1971 में गोविंद बल्लभ पंत के बेटे केसी पंत कांग्रेस से चुनाव लड़े और लगातार जीत दर्ज की इसके बाद 1977 में जनता दल की लहर में भारत भूषण ने जीत दर्ज की और 1980 में पहली बार सबसे कम उम्र के युवा सांसद पंडित नारायण दत्त तिवारी चुनाव लड़ा ओर जीत दर्ज की,, वही 1984 में गुड़िया,, 1989 महेंद्र पाल इस सीट पर कब्जा किया,, जबकि पहली बार 1991 में राम लहर के दौरान भाजपा के बलराज पासी ने जीत दर्ज की,,1996 में नारायण दत्त तिवारी,और 1998 मैं इला पंत ने जीत दर्ज की वहीं 1999 में फिर से पंडित नारायण दत्त तिवारी सांसद रहे पंडित नरेंद्र तिवारी के बाद 2004 और 2009 में कांग्रेस के केसी सिंह बाबा सांसद रहे लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के दौरान भगत सिंह कोश्यारी ने जनता के दिलों पर राज करा,
वही इस बार का चुनाव सबसे दिलचस्प होने जा रहा है क्योंकि इस बार दो दिग्गजों के बीच नैनीताल लोकसभा का चुनाव है जिसमें भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत आमने सेेमने है,,

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