नाबालिक बच्चों के साथ रेप और हत्या के मामले पर हाई कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित, पॉक्सो कोर्ट ने सुनाई थी फांसी की सजा।

ऋषिकेश में गुरुद्वारे के सेवादार द्वारा नेपाली मूल की महिला की नाबालिक बेटीयो के साथ रेप और हत्या का मामला नैनीताल हाईकोर्ट की शरण में पहुंच गया है, मामले में सुनवाई करते हुए नैनीताल हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख दिया है अब कभी भी हत्या और रेप के मामले में नैनीताल हाईकोर्ट की खंडपीठ से फैसला आ सकता है।

बीते साल ऋषिकेश में एक गुरुद्वारे के सेवादार सरदार परमानंद सिंह ने नेपाली मूल की दो नाबालिक बच्चों के साथ रेप के बाद हत्या कर दी थी जिसके बाद पुलिस ने रेप और हत्या के मामले में सेवादार को गिरफ्तार किया था, जांच के दौरान आरोपी परमानंद के बाल और डीएनए भी मैच हो गए जिसके बाद हत्या और रेप के मामले में पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश करा और कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए देहरादून की पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई थी।
प्रावधान है कि निचली अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाने के बाद उसको स्वीकृति के लिए हाईकोर्ट की खंडपीठ भेजा जाता है और इसी आधार पर आरोपियों को फांसी की सजा देने के बाद सजा की स्वीकृति के लिए नैनीताल हाईकोर्ट भेजा गया, और कोर्ट ने मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद वशिष्ट को न्याय मित्र नियुक्त किया और रेप और हत्या की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने को कहा था,,,
जिसके बाद आज अरविंद वशिष्ट ने मामले में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट की खंडपीठ में पेश की और मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के न्यायाधीश आलोक सिंह और न्यायाधीश रविंद्र मैठाडी की खंडपीठ ने रेप और हत्या के मामले पर फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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